इतिहास

उन्नाव ’उत्तर प्रदेश’ प्रान्त का एक जिला है। यह लखनऊ तथा कानपुर के मध्य में स्थित है, यह दो शहरों को जोड़ता हुआ एक जनपद है। उन्नाव को हिन्दी साहित्यकारों एवं देशभक्तों के नाम से जाना जाता है। उन्नाव के गंगातट पर बैठकर महर्षि वाल्मीकि ने दुनिया के प्रथम महाकाव्य ’चन्द्रशेखर आजाद’ के नाम से जाना जाता है। उन्नाव की भूमि ’साहित्यकारों’ की जन्मभूमि भी है और अपने पास कई साहित्यिक धरोहरों को संजोय हुए है। हिन्दी साहित्य में इसके समालोचको में आचार्य पं0 कृष्णाशंकर शुक्ल, आचार्य नन्द दुलारे बाजपेई, डा0 रामविलास शर्मा, डा0 शिवमंगल सिंह ’सुमन’ एवं भगवती चरण वर्मा आदि है। उन्नाव की ऐतिहासिक परम्परा को बनाये रखने हेतु जिले में एक सार्वजनिक पुस्तकालय की स्थापना पर विचार किया गया। उन्नाव में सन् 1982-83 में ’राजकीय जिला पुस्तकालय’ की स्थापना की गयी। कालान्तर में इसका नामकरण 27 फरवरी सन् 1991 में देश के गौरव स्वतन्त्रता सेनानी शिक्षाविद् श्री विश्वम्भर दयालु त्रिपाठी के नाम पर विचार किया गया जिससे कि पुस्तकालय का गौरव प्रदेश में ही नही बल्कि देश में द्विगुणित हुआ।

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